अभिनव भारत by राम सूचित मिश्र

अभिनव भारत

Author- पंडित राम सूचित मिश्र

ज्योतिर्मय हो जीवन अखण्ड।
जय झारखण्ड ! जय झारखण्ड।।
        तेरे आंचल के नग्न पुत्र,
        निस्पंदित, मूर्छित या प्रसुप्त।।
        अश्रुविहीन या नमनहीन।
        अनजाने कितने हुए लुप्त।।